कोई भी साधना बिना किसी जानकारी के ना करें

अप्सरा की साधना का परिणाम

लोग अपनी किसी स्वार्थ की पूर्ति के लिए किसी न किसी बेवजह का टोटका करते रहते है ,किसी किताब में पढ़ लिया या किसी ने बता दिया ,या किसी को करते देख लिया ,मैं एक इस व्यक्ति के बारे में आपको बताना चाहती हूं जो अक्सर ,व्रत उपवास पूजा पाठ बेकार के पाखंड किया करते थे ,कभी धन को पाने की कामना ,कभी किसी वस्तु को पाने की कामना ,कभी इसका बुरा कभी उसका बुरा आदि करने के लिए वो हमेशा धूनी लगाए बैठे रहते थे ,एक दिन उनको अप्सरा साधना के बारे में पता चला उन्होंने इसकी साधना रात को ही शुरू कर दी थी बहुत दिनो तक वे पूजा पाठ करते रहे ,अचानक सबने देखा की वो गांव से एक सुंदर लड़की से शादी करके चले आ रहे है घर में खाने पीने की कमी नहीं थी ,रहने को साधारण सा सुविधाजनक घर था ,वो उस सुंदर लड़की से शादी करके आए ,सबको न्योता दिया ,बुलाया गया ,महिला संगीत भी हुआ ,उनकी मां ,भाभी सबने महिला संगीत का आयोजन किया ,अब उन पति पत्नी को एक कमरे में सोने को दिया गया ,बहुत दिनो तक घर में शांति रही ,अचानक उनके घर से लड़ाई झगडे की आवाजें आने लगी,पति पत्नी खूब लड़ रहे थे ,उनका नाम गोपेश था ,अब गोपेश चाचा को मिर्गी का दौड़ा पड़ने लगा ,अब दिन में कई बार दौड़े पड़ने लगे ,उनकी अम्मा को बुलाकर लाया गया डॉक्टर को दिखाया गया पर उनका ये दौरा ठीक ही नहीं हो रहा था ,अब डॉक्टर ने कहा ये किसी सदमे से है ,डॉक्टर में उनकी अम्मा और चाचा को बुलवाया और कहा आप मुझे बताओ क्या बात है ,,,तब चाचा ने बताया की वो अप्सरा साधना करते थे ,दो साल तक साधना करने के बाद वो गांव गई वहां पर एक सुंदर लड़की से प्रेम हो गया और चाचा ने अम्मा की आज्ञा से उससे शादी कर ली ,कुछ दिन तक तो ठीक चला सबकुछ ,शादी के 6 महीने बाद चाचा को शरीर में कमजोरी लगने लगी ,अब पत्नी झगड़ा करने लगी की तुम्हारे तो शक्ति ही नहीं है ,तुमने मेरी साधना की थी मैं तो अप्सरा हूं तुमने मुझे वो सब न दिया तो मैं चली जाऊंगी ,अब चाचा भागे भागे फिर रहे थे,,,लड़ाई झगडे बढ़ते ही जा रहे थे ,एक बेटा भी हुआ जो गूंगा बहरा हुआ ,कुछ दिन बाद वो भी मर गया ,,डॉक्टर ने कहा तुम उसके पास जाना छोड़ दो नहीं अब तुम मरोगे ,चाचा ने जाना छोड़ दिया और अब नौबत मार पीट पर आ गई ,वो चाचा को खूब मारती थी ,आखिरी में वो पागल हो गई और कहने लगी जब तुमको मुझे रखना नहीं था तो मेरी साधना क्यों की थी अब मैं चली जाऊंगी ,,और वो अपने घर चली गई और वहां पर आग लगाकर आत्महत्या कर ली ,उसके घरवाले कह रहे थे की उनकी बिताया को एक साल से न जाने क्या हो गया था ,वो पागल नहीं थी पता नहीं केसे पागल हुई ,उसके मरते ही चाचा की मुर्गी ठीक हो गई ,चाचा की दूसरी शादी की गई ,आज चाचा के दो बच्चे है और चाचा साधारण जीवन जी रहे है ,इसमें क्या रहस्य है भगवान जाने पर कोई भी साधना बिना सोचे समझे नहीं करनी चाहिए। कहानी समाप्त

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