जीवन का रहस्य भी अनोखा रहस्य हैं जो बहुत ही गूढ़ है और अपने मे बहुत कुछ समेटे हुए हैं हम लोग इस रहस्य को जान नहीं पातें हैं और हमे अपने विचारों को ही समझना नहीं आता तो हम जीवन के छिपे हुए रहस्य को क्या समझेंगे
समझ से परे पर अगर समझने की कोशिश की जाए तो वह नाकाम नहीं होगी
हमारे जीवन की कुछ गलतियों की सजा हमे ही मिलती है पर दोषी दूसरे को ठहराते है
कुछ भी घटता है तो उसके दोषी हम ही है
विवेक और बुद्धि का सही समय पर सही उपयोग का ज्ञान नहीं हो पाता है और हम गलतियों पर गलतियाँ करते रहते हैं
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