जब हाथी भाग जाता है तब सौम्य सिंह का आदमी मंजुलता से कहता है तुम्हारा भाई बाहर है चलो जल्दी
मंजुलता उस आदमी का हाथ पकड़ कर भागती है और जंगल की तरफ चलती है
उधर सौम्य सिंह अपनी गाड़ी लेकर वहाँ पर खड़े हुए हैं
मंजुलता अपना मुह एक कपड़े से ढके हुए थी उसकी बड़ी बड़ी डरी हुई आँखे कुछ खोज रही थी
वो बोलती है की मेरे भैया कहाँ है
मैं तुम्हारे साथ नहीं जाऊंगी हट जाओ यहाँ से
मैं अपने भाई के साथ जाऊंगी
और वो वहीं पर खड़ी रहती है
सौम्य सिंह का आदमी कहता है की अजीब लड़की है ये कुछ समझती ही नहीं
सौम्य सिंह कहते है तुम गाड़ी मे बैठो मेरा विश्वास करो मैं तुम्हें तुम्हारे भाई के पास पहुंचा दूंगा मेरा विश्वास करो
मंजुलता गाड़ी पर चढ़ने की कोशिस करती हैं पर चढ़ नहीं पाती
सौम्य सिंह अपने हाथ को उसके लिए बढ़ाते हैं पर मंजुलता सौम्य सिंह को केवल देखती है पर अपना हाथ आगे नहीं बढ़ाती
केवल अपनी बड़ी बड़ी आँखों से सौम्य सिंह को टकटकी लगाकर देखती है
इस तरह मत देखो मुझे मेरा विश्वास करो मैं तुम्हारे भाई के पास तुम्हें ले चलूँगा
क्रमशः
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