सबक

सबक हर किसी को अपनी गलतियों का मिलता ही रहता है जैसे हम कोई गलती करके उससे नुकसान उठाते हैं तो हम समझते हैं कि हमें उस गलती का सबक मिल गया

अगर हम उस गलती को बार बार दोहराते हैं तो नुकसान ही नुकसान होता है पर फिर भी हम उस गलती से सीख नहीं लेते

सोने का पिंजरा उसमे एक पंछी कैद था रोता था चिल्लाता था पर उसमे ही कैद था

दूसरे पंछियों को वह उड़ते हुए नील गगन मे खुश रहते देखता था

पर वो अपनी गलती पर बार बार पछताता और फिर भी न सबक पाता

एक दिन एक उसका साथी उसका एक तरफ से पिंजड़ा खुला हुआ दिखलाता

पर न जाने वो पागल पंछी बाहर आने से क्यों था डरता

एक बार की गलती से वो बार बार पछताता था

एक इंसान पर किया भरोसा बस उसके मन मे आता था

गलती पर उसे मिला सबक था कैद हो गया जब वो

पर अब न करेगा गलती, खुला हुआ था पिंजरा उसका वो अब बाहर जो आया

बाहर की ताजी हवा मे साँस लेकर नया था जीवन पाया

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