लिखती हु अपना दर्द

मित्रों अपनी उम्र से पहले ही मैं बूढ़ी हो चुकी संघर्ष ही जीवन है यही सोंच कर अपने मन को मसोस कर रह जाती हु

लेकिन फिर भी संतुष्टि होती है की अपना दर्द तो दूसरो के दर्द से कुछ कम ही है

कुछ इस जन्म के कर्म हैं या कुछ पिछले जन्म का कर्म या कुछ मेरी संतान के कर्म है

मुझे ये चिंता होती है की आज मैं और मेरे पति हैं कल जब मैं नहीं रहूँगी तो इसे कौन देखेगा कौन इसे सहेगा कौन इसे खाना देगा, कौन उसे अपने घर मे रखेगा ये आम लोगो की तरह अपना जीवन नहीं बिता सकता इसे किस्मत के सहारे भी नहीं छोड़ा जा सकता

छोटा बेटा अक्सर मुझे ताने मारता है मेरा जीवन तो बर्बाद कर दिया मम्मी आपने अब इसे कौन पालेगा इसे पेट मे ही क्यो न मार दिया मम्मी

पर ये नहीं जानता की अलग रहना कितना मुश्किल होता है ये क्या खाएगा और मैं क्या खाऊँगी, मै कमाने

हमेशा सब ताने मारते रहते हैं पति के तिरस्कार की शिकार मैं बनी, कहते है की एक संतान अच्छी न दे सकी तुम जब तुम्हारे कमी थी तो शादी क्यो की थी तुम्हारे माँ बाप ने

मैं अपने पति को कैसे समझाऊँ की मेरा कोई दोष नहीं मैं अगर ये जानती की मुझे ऐसी संतान होगी तो मैं अपना जीवन अकेला कर लेती किसी से विवाह ही नहीं करती लेकिन मुझे तो कुछ पता नहीं

मैं अपने बेटे को कैसे समझाऊ की ये अपनी किस्मत लेकर आया है अपनी किस्मत का ही खाता है और मैं भी इसी की किस्मत का खाती हु ये तब भी मेरे लिए luky है मेरी जान है मेरा बेटा, मुझे सताता है पर मुझे बेहद प्यार करता है, बहुत भोला और बहुत मासूम है घर के कामो मे मेरा हाथ बटाता है मै आज रो रही थी तो मुझे रोता देखकर मुझे इसने कहा मम्मी रो मत हम तुम दोनों उस पुराने घर मे रहेंगे, तब ये लोग वहाँ नहीं आ पाएंगे और मुझे और तुम्हे नहीं मारेंगे न ही तुमको कुछ कहेंगे

अब मैं बहुत परेशान हु बहुत रोती हु मैं मर नहीं सकती न इसे मरता देख सकती हु आप सभी मेरे मित्र है आप लोग भगवान से प्रार्थना करिये की मेरा बेटा शैतानी न करे और हम दोनों सम्मानीय जीवन बिताएं न ये डाँट मार खाए और न मुझे कोई अपमानित करे हम दोनों रूखी सुखी रोटी खाकर जीवन बिता लेंगे

हम दोनों परेशान आत्मा हैं मित्रों शायद आप लोगो की प्रार्थना से हम दोनों का जीवन खुश हाल हो जाए 🙏🙏🌹🙏🙏

5 responses to “लिखती हु अपना दर्द”

  1. I can understand your pain Anupama, it’s not your mistake, according to our sanatan dharm our fate is already decided according to our previous birth karma. Your husband is the main cause. If any pithru karya is not done properly this kind of deficiency in the children happens. So meet a priest, taking your son’s horoscope and do the pariharam accordingly. Things will become better.
    We have three kinds of RUNAS (debts), Deva runam, Rishi runam and pithru runam. Every one should clear these RUNAS according to their rituals. So do it. You will get a solution.

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    1. What you say is absolutely true, absolutely correct. Your advice is very good.

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  2. That’s why I shared my pain with all of you friends, you have given me a lot of relief with your words 🌹🌹 Thank you very much

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  3. Ok take care , prayers 🙏 can do miracles. I too have crossed many obstacles to reach a better state. I never give up any of our customs. My son was often falling sick in his childhood till the age of 12. We did lots of pariharams. Now he is fine . Living abroad with his family. So I can suggest you this

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