बवाल न करो, मंद मंद न आहें भरो अपनी तो रग रग बनी है बस दुखने के लिए, दुखती है तो अपने को समझाओ, मौन रहो, चीत्कार न करो, किसी को अपनी रग का पता न दो, दे देते हो सबको अपनी रग का पता और फिर जब लोग दुखाते है तो कहते हो की रग दुखती है❤
बवाल न करो, मंद मंद न आहें भरो अपनी तो रग रग बनी है बस दुखने के लिए, दुखती है तो अपने को समझाओ, मौन रहो, चीत्कार न करो, किसी को अपनी रग का पता न दो, दे देते हो सबको अपनी रग का पता और फिर जब लोग दुखाते है तो कहते हो की रग दुखती है❤
Leave a reply to surinder kaur जवाब रद्द करें