एक रोचक और बहुत ही प्यारी सी याद जो आज भी मुझे तरो ताजा बना देती है

अंडमान मे हम घूमने गए थे और गाड़ी से घूमते थे अपने परिवार के साथ मैं हवाई जहाज से airport पर जब उतरी तो वहाँ पर बहुत ही अच्छा मौसम था

कोलकाता मे सर्दी थी हम लोग स्वेटर पहनकर गए थे तो गर्मी के कारण स्वेटर मफलर सब उठाकर बाग मे रख लिए और होटल की तरफ हमारी गाड़ी बढ़ गई वहाँ पर हम लोग बहुत ही उत्साहित थे

अब हमने सोंचा की चलो समय न बर्बाद करके हम लोग अभी घूमने चलते हैं

और हम लोग अंडमान के, पोर्ट ब्लेयर मे पास पास की जगह मे घूमने लगे

अब भूख लगी हम लोगो ने एक साधारण से ढाबे मे खाना खाया वहाँ पास मे एक शाकहरि ढाबा था दाल चावल सब्जी मिल रही थी रोटी नहीं मिलती थी

हम लोगो ने वहीं पर खाना खा लिया और आगे बढे कितना सुंदर द्रश्य और कितनी शांति थी कितना सुंदर जंगल, नारियल के पेंड थे सुपाडी के कितने सारे पेंड थे

एक जगह आम के पेंड थे उसमे कच्चे कच्चे आम लगे थे

समुद्री किनारे थे

समुद्री हवा थी

सबकुछ था परंतु शाकाहारी खाना बहुत खोजने से मिलता था सब जगह मछली sea food मिल रहा था खैर हम लोग अपने घर से जो बना कर लाये थे वही खाने अपने होटल मे आ गए मेरे पति किसी होटल का पता लगाने चले गए जहाँ पर अच्छा खाना मिलता हो

तभी वो आए तो वे बहुत खुश थे मैंने कहा की क्या होटल मिला चलो चलते है खाना खाने

वे बोले चलो ऐसी जगह ले चलूँगा याद रखोगी

अब मैं और मेरे दोनो बेटे उनके साथ गए तो कुछ दूर पर चलते हुए हम लोग जगह का आनंद भी ले रहे थे बहुत दूर चले आए वहाँ पर एक गुरुद्वारा था वहाँ पर लंगर था

गुरुनानक जी का कोई त्यौहार था तीन दिन के लिए वहाँ पर लंगर था

पंजाबी लोग जो सरदार थे वे हम लोगो को देखते ही खड़े हो गए मैंने कभी लंगर नहीं खाया था इसलिए मुझे अटपटा सा लगा रहा था

मैंने अपने पति से कहा नहीं मैं नहीं जाऊंगी मैंने तो खा लिया है थोड़ा सा जो भी था मैं वहाँ नहीं खाऊँगी

मेरे पति ने कहा की हम फिर यहाँ कब आएंगे कोई ठीक नहीं यहाँ का गुरुद्वारा है, अच्छा ठीक है तुम दर्शन कर लेना खाना मत लेकिन मना मत करो

वाहे गुरुजी का दरबार है बड़ी कृपा है आज

और मैंने उनकी बात मान कर अपने बेटो के साथ चलने लगी

मैं वहाँ पहुंची काफी दूर था पैदल ही चल रहे थे हम लोग चारो तरफ हरियाली का आनंद ले रहे थे

Tab

तभी गुरुद्वारा भी आ गया काफी लोग वहाँ पर थे सब पंजाबी और सरदार

तभी एक सरदार जी वहाँ खड़े थे वे मेरे पति के पास आकर रुके और बोले परिवार को ले आए

अब वे बहुत खुश हुए हमे देखकर मैं उनसे बहुत प्रभावित हुई वे बुजुर्ग थे, मैंने उनको नमस्कार किया उनकी पत्नी और उनके दो नाती और परिवार के कई लोग साथ खड़े थे

अब मेरे पति तो उनके साथ चले गए और मेरे बेटे भी उनके साथ हो लिए, मुझे तो जिसे वे लोग भूल ही गए

अब मुझे समझ न आए की मै जाऊँ तो कहाँ जाऊँ तभी एक किसी की बहू अंदर से मुझे देख रही थी और वो बाहर आई और बोली आंटी जी आप मेरे साथ आओ मैं

बहू के साथ चली गई उसने मुझे हाथ धुलाए और कहा आप अंदर दर्शन करो

मैंने वाहे गुरु के दर्शन किये और प्रसाद मे मिलने वाला हलवा खाया और कुछ देर कालीन पर बैठी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था मैंने वाहे गुरुजी को माथा टेक दिया और बाहर की ओर जाने लगी

तभी एक बुजुर्ग महिला ने मुझे रोक कर कहा की बेटी लंगर चख कर जाना भले ही एक टुकडा ही खाना वो मेरे चेहरे के मनोभावों को पढ़कर जान गईं थी शायद की मैं लंगर नहीं खाना चाहती

तभी मैंने कुछ लोगो को बात करके सुना की वाहे गुरुजी के दरबार मे सबकी किस्मत बदलती है कैसा घमंड करना पता नहीं समय कौन सा दिन दिखा दे वाहे गुरुजी का लंगर हम जरूर खाते हैं कुछ भी हो मेरा dim

दिमाग बिल्कुल बदल गया मैंने देखा की सब एक पंक्ति मे बैठे थे सिर पर कपड़ा था मैंने भी अपनी चुन्नी सिर पर रख ली हाथ जोड़े और लंगर खाने बैठी उसमे कढी चावल, रोटी सब्जी थी रोटी मे घी लगा था और हरि मिर्च भी थी मुझे कढी बहुत अच्छी लगी और मैंने खाना खाया

अपनी झूटी थाली लेकर मैं धोने पहुंची तो देखा की एक सुंदर सी, किसी की बहु सबके बर्तन धो रही थी मैंने कहा की लाओ मैं भी बर्तन धों दु उसने मुझे बर्तन नहीं धोने दिये उसने कहा आंटी आप जाओ चाय पीकर आओ मैं बर्तन धो रही हूँ

सबका प्यार भरा बर्ताव देखकर मैं बहुत दंग रह गई सब लोग कुछ न कुछ सहयोग कर रहे थे

मैं रास्ते मे चल रही थी अपने होटल को लौट रही थी तभी मेरे पति ने कहा की कैसा लगा तुम्हे वहाँ अब मेरे पास कोई जवाब नहीं था मैंने उनसे कहा की अब कब जाएंगे गुरुद्वारे, मेरे पति ने कहा की ये कल और रहेगा लेकिन हमारी तो फ्लाइट है अब नहीं जा पाएंगे शायद लंगर मे प्रसाद हमारी किस्मत मे था our

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