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पति और पत्नी दोनों ही हैं एक सफर
के राही और दोनों का है एक ठिकाना
हंसी खुशी, प्यार मनुहार से मिल जुल
कर अपने सपनों का आशियाना बसाना,
सफर बहुत लंबा है, मित्रों रास्ते भी ऊबड़
खाबड़ हैं और आएंगे कुछ तो अंधेरे मोड़
एक दूसरे का हाथ थामे रहना विश्वास
हिम्मत और हौंसला न देना कभी छोड़,
जब कभी झगड़ा हो आपस में या हो
जाए एक दूसरे से कभी थोड़ा मनमुटाव
तुम ही थोड़ा सा झुक जाना, थोड़ा नरम
पड़ जाना खाना नहीं तुम ज्यादा भाव,
अपने आपस की बातों को, झगड़े के
कारणों को किसी और को न बताना
समस्या का हल तो कोई भी नहीं ही
निकालेगा बस मजाक उड़ाएगा जमाना,
परिस्थितियों को ऐसे संभालना कि एक
हो जाना चुप जब दूसरा रहा हो बोल
कुछ अप्रिय न बोलना तुम और बेहतर
है कि बोलने से पहले शब्दों को लेना तोल,
कभी भी दूसरे को नीचा मत समझना
और न ही समझना उसको तुम हीन
तुम्हारे रिश्ते में जो प्यार और विश्वास
की डोर डली है वो तो है बहुत महीन,
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