नश्तर से चुभते हैं अपनो के शब्द
जिनको कभी किया था दिल से प्यार
वे ही उस प्यार को नहीं समझते
किसी को समझाना भी नहीं है
हैरान हु मै अपनी ही छोटी सी गलती पर
क्यों किया था उन लोगो को दिल से प्यार
औपचारिकता निभा लेती तो इस तरह घुटना न पड़ता
खैर देर आए दुरस्त आए
अब समझ गई हु सारे अपने को
ठहर सी गई है अब जिंदगी
लेकिन समय आगे बढ़ता है
कुछ समय ही तो मिला था अपनो को समझने मे थोड़ा वक़्त लगा
पर लगा अपने तो अपने होते हैं पर गैर क्या होते हैं शायद अपनो से परे ही तो होते है
एक खट्टी सी सिहरन
जो मन को आज भी विचलित करती है
और कहती है अब भी संभल जाओ अपने आप से प्यार करो अपने आप पर ध्यान दो, अपने आपको खुश रखो
सब अंजाने से हैं, दुनिया वीरान नहीं अभी बहुत कुछ है करने के लिए
अभी बहुत कुछ बचा है जीने के लिए 🌹🌹🌹🙏🏽🙏🏽🙏🏽
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