कुछ दिली तमन्ना

मै अपनी कुछ दिली तमन्ना रखती हु की मै एक गुमनाम हु, अंजान हु, साधारण हु, दूसरों पर निर्भर हु, मै आत्मनिर्भर बनना चाहती हु, अपनी स्वयं की मल्लिका, मेरे उपर कोई हक न जमाये, तानाशाही जो लोग मुझे दिखाते है, एक खुली हवा मे साँस लेना चाहती हु, खुद के अनुशासन मे रह कर अपना जीवन, साधारण जीवन खुश होकर बिताऊं बहुत नहीं, पर्याप्त हो, सागर नहीं सिर्फ गागर हो

अंधकार से दूर प्रकाश की तरफ बढ़ती चलूँ, एक नई दिशा की ओर,,,,,,, 🌹🌹🌹🙏🏽🙏🏽🌹

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