मेरा बेटा बहुत बीमार था
मै 20 साल की और वो नवजात बच्चा 15 दिन का
कुछ लोगों ने तो घर मे आना ही बंद कर दिया था बेटा और मै अस्पताल मे भर्ती थे
मेरे माँ बाप, भाई पैसों का इंतजाम करने के लिए कभी अपने जेवर बेंचते कभी उधार लेते
ससुराल वालो का भी कुछ पता नहीं था उन्हे पता चल गया था की हम दोनो बीमार हैं पैसे बहुत लग रहे हैं
बस मे मैं अकेले अस्पताल जाती थी तो अगर बस मे भी जान पहचान के लोग मिल भी जाते तो मुझसे आँखे चुराते की कहीं मै उनसे पैसे न मांगने लगूँ या किसी मदद की बात न कर दूँ
ये देखकर मेरी आँख भर आती की ये वही लोग थे जो मुझे बहन बेटी कहते थे
मेरे घर आते जाते थे चाय पानी करते थे आज ये लोग कितना बदल गए
क्युकी इन्हे मेरी स्थिति का पता लग चुका था
खैर हम लोग कुछ दिनों के बाद बच्चे को लेकर घर वापस आ गए
डॉ साहब ने फीस माफ कर दी थी और रूम का चार्ज भी कम कर दिया था
दवा का पैसा भी कम कर दिया था
जिससे हम लोगो को बहुत राहत मिली
लेकिन मुझे तो सीख मिल ही गई की कोई किसी का नहीं होता अपने भी गैर हो जाते हैं
आज मै पैसों की बहुत कद्र करती हु अपने पैसे बर्बाद नहीं करती
मै जान गई हु की किसी से मदद लेने के बजाय कुछ अपने पास भी रखना जरूरी है
लोगो की भीड़ मेरे पास नहीं है कुछ गिने चुने लोग ही हैं जिन्होंने मेरी मदद की उन्हे कैसे भूला जा सकता है
लेकिन सीख मिली की लोगों मे समय बर्बाद न करके अपने परीवार और अपने लोगो की, जो अपने साथ हैं उनकी सेवा और देखरेख मे समय का सदुपयोग करना बेहतर है 😊😊😔😔
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