दीवाना उसका परवान चढ़ा इश्क
मिलते थे कभी दोनो
नहीं करते थे परवाह किसी की
लेकिन जमाने के कुछ उसूलों ने
अलग किया दोनो को
नहीं सह सका वो आशिक उसकी मुहब्बत से अलग होकर
और कूद पड़ा
कुएं मे
खत्म कर दी जिंदगी उसने
नही सोंचा कैसे जीएगी वो
तिल तिल कर मरेगी वो उसके बाद
हुआ वही
उसका प्यार उसका प्यार जब न मिला उसे
जब देखा उसने उसकी अंतिम यात्रा को
आँसू सूख गए
गुलाबी चेहरा पीला हो गया
वो चिल्ला चिल्लाकर कहती नहीं
नहीं अब कोई नहीं है
प्यार मेरा इश्क मेरा
और वो आज भी पागल थी
और जाती थी उसकी कब्र पर
सूखे पत्तों को बिछाकर सोती हुई अपनी अंतिम साँसे गिनती हुई
कहती रही
ए जानम
मेरे खुदा
ये कैसी की यारी तूने
कहाँ है अब वो तेरा हाथ
कहाँ है अब वो तेरा साथ
तभी एक फकीर आता है, गुजरता है
ए पगली जरा कान लगाकर कब्र मे तो सुन
तेरा इश्क तेरा आशिक तुझसे क्या कहता है
तभी वो कब्र मे कान लगाकर सुनती है सिर्फ झींगुर की आवाज
कुछ आवाज पानी की कल कल की आवाज
पगली कहती है मै मर रही जिसकी y
याद मे वो तो मुझे कहता है
जगत मे तो सब पानी है, सब फानी है तू क्यो मुझे याद करती है यहाँ सबकुछ तो आनी जानी है
मै तो खुश हु अपने वजूद मे इसमे न तड़प है न शिकवे हैं तू भी चली जा अब Meri
मेरी तरह इस जिंदगी से
और अब वो पगली भी उसी कुएं मे कूद जाती है
उसकी आँखे खुली रह जाती है, वो चील कौवो से कहती है की मेरी आँखों को मत खाना ये मेरे आशिक का
और वो मर जाती है 😔😔
अब वो फकीर उसका मुह धोता है उसकी खुली आँखों को बंद करके कहता है तेरा आशिक तुझे कुछ तो दे गया वो जन्मो का इंतजार दे गया 🌹🌹
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