ससुराल मे बहुत छोटे छोटे कमरे थे
एक ही कमरे मे मैं सोती खाना खाती थी उसी मे मेरे पति कोचिंग भी पढ़ाते थे
सास ससुर, दो ननंद, सब बड़े झगड़ालू किस्म के
जरा सी भी गलती हो जाए तो अनाप शनाप बकना शुरू हो जाता था
ऊपर से बहुत गर्मी पड़ती थी
एक टेबल फैन था जो मेरे कमरे मे रहता था
दूसरा सास ससुर के कमरे मे
अब मुझे रसोई मे बहुत गर्मी लगती
सब पंखे मे हवा खाते या बाहर हवा मे बैठ जाते
जरा सा पंखा चालू करती तो सासु माँ हिदायद देतीं की पंखा रात मे चलेगा और मै चुपचाप गर्मी मे खाना बनाने चली जाती
रोज 35 रोटियां बनाती थी एक बार का खाना सुबह
शाम को भी 35 रोटियाँ और सब्जी बनाती
May का महीना ऊपर से गर्भवती थी
अब मेरे पूरे शरीर मे दाने पड़ गए
ऊपर से लाल चीटीओ और कॉक्रोज ने दम काट रखा था
अब पूरा समय पसीना बहता था
बहुत तकलीफ थी
जब घमिरियों के ऊपर पसीना बहता था तब बहुत ही तकलीफ होती थी
ऊपर से इतनी गर्मी मे खाना बनाती जब सब खाने बैठते तो कोई न कोई नुक्स निकाल दिया जाता
रात मे पतिदेव भी खूब बवाल काटते, लड़ते झगड़ते, उलाहने देते की अच्छा खाना भी नहीं बनाना आता तुम्हे 😔😔😔😔
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