जब मै उनके पास दोपहर या शाम को जाती तो वो मुझे बैठने को न कहती और मैं वही पर खड़ी रहती
थोड़ी देर के बाद वो मुझे बैठने के लिए कहती और मै बैठ जाती
उनसे पूँछती अम्मा आज खाने मे क्या बनेगा
तो कहती आज कुछ मजेदार बनाओ
मसालेदार
मै कहती अच्छा और बच्चे को उनकी गोद मे देकर चली जाती वे बच्चे को भजन सुनाती थी
अब एक दिन मेरी उनसे कुछ लड़ाई हो गई और मै बहुत गुस्सा थी उनके ऊपर अब मै अम्मा से क्या कहूँ
लेकिन अम्मा समझ गई और कहने लगी की आदमी की जुबाँन कठोर होती है
बाहर काम करता है हर तरह के लोगो से सामना करता है अगर तुम्हे वो कुछ गुस्से मे कह देता है तो इतनी गुस्सा, प्यार तो वो तुम्हे ही करता है क्या तुम्हारे मुह नहीं है गूंगी हो तुम
जवाब नहीं दे सकती उसे
और कहती की तुम्हारे अंदर पावर की कमी है सहना नहीं रहना सीख
वो पॉवर जो अपने अंदर होता है
लोगो को पहचानो
कुछ पैसा बचाकर रखो
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