सुसाइड वास्तविक रुप से
सुसाइड नही होती
हत्या होती है उस इन्सान की
जो पीड़ा से घिर चुका है
जो अंदर से टूट चुका है
जो परेशान हो चुका है
इस खोखले समाज से
अपनी जिम्मेदारियों से
उसकी हत्या के पीछे एक नही
कई इन्सानो का हाथ होता है
कभी किसी टीचर की बेज्जती
तो कभी किसी अपने का धोखा
कभी परिवार की अनगिनत इच्छा
कभी महोब्बत में मिली बेवफाई
कभी किसी के झूठे इल्जाम
इन सबसे परेशान होके इन्सान
मौत को लगाता है गले
और चला जाता है इस जहां से
क्युकि जीने से ज्यादा
मरना आसान लगता है
लोग उसे सुसाइड बोलते हैं
सुसाइड वास्तविक रुप से
सुसाइड नही होती
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