ये कैसी किस्मत है ये कैसे कर्म है

ये कानपुर के bithur एक जगह है

वहां पर एक आदमी मर गया था

उसके अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू की जा रही थी पंडित मंत्रोच्चारण कर रहे थे 

चिता मे आग लगाई गई

और देखा कि उसमे हलचल हो रहीं है

लोग ध्यान से देखने लगे तभी चिता से वो आदमी बाहर निकलकर तड़पने लगा

उसके शारीर में आग लगी थी वो पूरी बहुत जल चुका था

शायद उसकी प्राण वायु वापस लौट आई थी उसकी साँस लौट आई थी

मरने के बाद कुछ समय के लिए चेतनता जरूर वापस आती है जब कोई शरीर जलाया जाता है

जब उसका अंतिम संस्कार होता है चिता की लपट उठती है तो उसकी चेतनता एक बार तो वापस जरूर ही आती होगी परंतु उसे तो दर्द का एहसास ही नहीं होता

वो जलता हुआ अपने शरीर को दूर से देखता है लेकिन कुछ कर नहीं सकता

लेकिन इस आदमी की चेतनता शरीर मे वापस आ गई शायद इसे होश आया होगा और उसे लपट की गर्मी महसूस हुई और दर्द महसूस हुआ

उसकी जान वापस आ गई और अब तो दर्द सहना से बाहर हो चुका था

क्या एक जीव जीता जागता जल सकता है

बहुत पीड़ा होती है परंतु शरीर इस पीड़ा को झेल नहीं पाया और बाहर निकलकर तड़पने लगा

इसे अस्पताल ले जाया गया जहां इसकी ज्य़ादा जल जाने के कारण फिर से मौत हो गई

जब ये दोबारा मरने वाला था तब इसने बताया था कि वो एक चिर निद्रा मे चला गया था लंबी नींद मे

जब कोई मरता है तो कुछ देर उसे रखा जाता है डॉक्टर उसे ठीक से देखकर बताते हैं कि वो मर चुका

8 या 9 घंटे के बाद उसकी अंतिम क्रिया की जाती है

अपने कर्म सही रखो, पिछले जन्म के कर्म भी इस जन्म मे भोगने पड़ता है और इस जन्म का अगले जन्म मे

इस इंसान का कोई कर्म होगा जो इसे दोबारा मरना पड़ा

ये वीडियो जब मेरे सामने आया तो मुझे हैरानी हुई

मुझे ये लगा कि मरने के बाद चेतनता कुछ क्षणों के लिए वापस आती है

शरीर के सारे अंग निष्क्रिय हो जाते है तो वो चेतनता कुछ नहीं कर पाती

मरने के बाद दिमाग जल्दी नहीं नष्ट होता

अनुभव करने की शक्ति खत्म हो जाती है तभी चिता की लपटों के बीच मे दर्द महसूस नहीं होता

पर इस आदमी की चेतनता, और अनुभव दोनों साथ मिलकर इसे पीड़ा देने लगे और ये चिता के बाहर निकलकर तड़पने लगा

“ये कैसी किस्मत है ये कैसे कर्म है” के लिए प्रतिक्रिया 4

टिप्पणी करे

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें