देव दासी भाग 510

देखते ही देखते उसी दिन बात पक्की हो जाती है आखिर कामिनी के जैसी लड़की और इतना अच्छा जाना पहचान का घर कहा मिलेगा

गोद भराई की रस्म आयोजित करने का दिन अभी बाकी था

पंडित जी से उसकी तिथि भी पक्की करानी थी

दोनों के पिता जी गले मिलते हैं और अभी तब वीर सिंह को कुछ भी पता नहीं था

अब कामिनी के पिता और भाई लोग घर आ जाते हैं और वे सबको ये खुशखबरी सुनाते हैं कि कामिनी की शादी पक्की हो गई है

वो लोग मान गए हैं आखिर हमारी कामिनी है ही ऐसी

सुंदर सुशील सर्वगुणसंपन्न

अब कामिनी जब ये बात सुनकर बहुत ही भावुक हो जाती है उसकी आँखों मे आंसू आ जाते है एक तो मनपसंद पति और दूसरी तरफ घर से बिदाई होने का कष्ट

कितने लाड-प्यार से उसे पाला था सबने सब उसे जान से ज्यादा प्यार करते थे क्रमशः

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