
दबंग लोग आते हैं परंतु कुछ सोंचे बिना ही दूसरों को सताने लगते हैं वे ये भूल जाते हैं कि उनके ऊपर भी कोई है
एक आदमी बहुत बलवान था पैसे से भी अमीर था वो जिसको चाहता उल्टा सीधा बोलता रहता जिसके ऊपर भी हाथ उठा देता कोई उससे कुछ ना बोलता सब बहुत डरते थे
बहुत दिन तक ये सब चलता रहा मुहल्ले मे सब उसके अहसान तले दबे हुए थे वो कितने लोगों को उधार पैसे दे देता था
अब एक दिन मुहल्ले मे एक मुल्ला जी भी रहने आ गए वे बड़ी शांति प्रवृत्ति के थे बहुत कम बोलते थे
वो किसी से कुछ भी ना मांगते सभी लोग मुल्ला जी की खूब तारीफ करते
मुल्ला जी रोज मस्जिद मे नमाज पढ़ने जाते और जो उनको मिल जाता था उसमे ही वे खुश रहते
मुल्ला जी भी उस आदमी को जान गए थे वे रोज उसे देखते थे और वो भी तिरछी निगाह से
मुल्ला जी तो कुछ मांगते नहीं थे उससे ना उससे कुछ बोलते अब वो मुल्ला जी से चिढ़ा हुआ था
उसने मुल्ला जी के ऊपर व्यंग करना शुरू कर दिया उसने सोंचा कि मुल्ला जी दुबले पतले है वे कूछ बोलेंगे ही नहीं
अब एक दिन वो मुस्लिमों की भी हँसी उड़ाने लगा उनकी मस्जिद का मजाक उड़ाने लगा अब मुल्ला जी कैसे सहते उन्होंने उसे पीछे से टांग फंसा कर उसे गिरा दिया और उसके ऊपर चढ़कर अपनी टोपी को उसके मुह के ठूंस दिया और बोले मैं तुम्हारे रहमोकरम पर नहीं रहता हू तुमने मुझे कुछ कहा मैंने सहा लेकिन मेरे धर्म को कहा मैं वो नहीं सह सकता और तीन चार मुक्के उसके मुह मे मार
उसे लोग बचाने आए तो मुल्ला जी ने कहा कि ये दबंग लोग है
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