पेट की खातिर

कभी किसी मजदूर या किसी मेहनती इंसान को देखा है

कभी पेट की आग बुझाने के लिए किसी को मारे मारे फिरते देखा है

किसी लड़की को अपने पेट की खातिर बाजार मे खड़े होकर जिस्म बेचते देखा है

किसी इंसान को अपने पेट के लिए कूड़े के ढेर से रोटी के टुकड़े चुनते देखा है

किसी माँ को अपने बच्चों के लिए सड़कों पर भीख मानते देखा है

तुमने किसी को अपने पेट की खातिर कभी गंदगी को साफ़ करते देखा है

पेट अपना भरा होता है तो कुछ समझ नहीं आता क्या तुमने कभी एक दिन खुद को भूखा होते देखा है

सजाते हो रोज महफिलें पार्टियों की क्या तुमने अंधेरी गालियों मे किसी को रोते देखा है

चलते हो तुम गालियों मे ,क्या तुमने किसी को पेट की खातिर अमीरों की सीढ़ियों मे पैदल जाते देखा है

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