
रामायण के अनुसार हनुमान जी ब्रम्हचारी थे परंतु इनका भी विवाह हुआ था उनको मजबूरी मे विवाह करना पड़ा वे चार विधाएँ लेना चाहते थे 5 विधाएँ वे ले चुके थे अब ye4 विधाएँ लेने के लिए विवाह करना अनिवार्य हो गया था
हनुमान जी ने सूर्य देव की पुत्री suvarchalaa से विवाह किया था ये एक साध्वी थी सूर्य देव ने हनुमानजी जी से कहा कि तुम्हें ये 4 विधाएँ पाने के लिए विवाह करना आवश्यक है
लेकिन हनुमान जी ने कहा कि मैं तो ब्रम्हचारी हू विवाह कैसे करूंगा कोई ऐसी कन्या हो जिससे विवाह करके मेरा ब्रम्हचर्य बना रहे वो खण्डित ना हो
तभी सूर्य देव ने अपनी बेटी से ये बात कही उनकी बेटी तपस्या कर रही थी उन्होंने कहा कि मैं अगर विवाह करुँगी तो मेरी तपस्या खण्डित हो जाएगी लेकिन सूर्य देव ने सारी बात अपनी बेटी suvarchala को बताई परंतु suvarchala ने वचन ले लिया कि वो विवाह के तुरंत बाद तपस्या करने चली जाएगी
हनुमान जी ने वचन दे दिया और तब दोनों का विवाह हुआ विवाह के तुरंत बाद हनुमान जी की पत्नी हिमालय चली गई और हनुमान जी का ब्रम्हचर्य भी बच गया तब हनुमान जी ने वे 4 विधाएँ प्राप्त की
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