मैं सितार की छात्रा थी और भी लड़कियां सितार सीखने आती थी वहाँ पर एक तबला बजाने वाले सर जी भी आते है
क्योंकि सितार के साथ संगत भी करनी पड़ती थी तबला नहीं बनेगा तो सुर कैसे मिलेगा
अब हम लोग तो सिर्फ तबला पर ही रुचि रखते थे परंतु एक लड़की तबला बजाने वाले sir जी को बहुत देखती थी अब मैं क्या कर सकती हू मुझे इससे क्या मतलब वो तबला बजाने वाले सर जी भी उसको तिरछी निगाह से खूब देखते थे
एक दिन वो लड़की क्लास मे नहीं आई और तबला बजाने वाले सर जी आए परंतु जब वो उनको नहीं दिखी तो वो मुह बना कर बैठ गए
उनका मन संगत मे नहीं लगता था
हम लोग सितार बजाते थे वे कूछ और बजाने लगते थे
मैडम ने सोंचा की सर जी की तबीयत खराब है इनको छुट्टी दे दी जाए
अब तो दूसरे दिन भी वो नहीं आई
फिर सर जी का मूड खराब फिर वो भाग गए कहने लगे कि मैं अब तबला बजाना छोड़ दूँगा
तीसरे दिन तबला बजाने वाले सर जी नहीं आए वो लड़की आई अब उसका मन सितार बजाने मे नहीं लग रहा वो भी भाग रही थी बैचैन ,पागल सी
अब एक सहेली समझ गई और मैडम से बोली मैडम कुछ चक्कर है इनका
मैडम बोली किस से
अब एक दिन दोनों नहीं आ रहे थे करीब 15 दिन से
15 दिन के बाद मेरी सहेली आई उसकी मांग मे सिंदूर चमक रहा था अब उससे सारी सहेलियाँ नाराज हो गई
शादी मे क्यों नहीं बुलाया गया
तबला वाले सर जी भी बड़े खुश थे
हम लोगों ने कहा कि कम से कम फोटो तो दिखा दो उनकी
मेरी सहेली ने तबला वाले सर जी का हाथ पकड़ कर आगे कर दिया बोली लो ये हैं मेरे वो
सब लोग हंसने लगे
अब हम लोग पूछते की कैसे हुआ ये सब
तो सहेली ने कहा कि मुझे इनसे प्यार था इनको भी मुझसे था मैंने अपने घर वालों को बताया इनके बारे मे इनके घर वाले भी राजी हो गए मेरे वाले भी और जल्दी शादी हो गई
अब मैं देखती थी कि दोनों रोज हाथ पकड़ कर आते थे और खूब खुश रहते थे
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