ओशो ज्ञान

संपूर्ण पृथ्वी की राजा बनो ,या भारत की राजा बनो ,या त्रिलोक की अधिपति बनो ,या पूरे विश्व की भगवान बन जाओ ,या अमर हो जाओ या शिव या विष्णु बन जाओ , अगर स्वयं को नहीं जान पाए ,तब सब बेकार होगा राजा बनकर या भगवान बनकर । कितना ज्ञान या विज्ञान जान लिए ,सब बेकार होगा अगर स्वयं को नहीं जाने । पढ़ो उपनिषद ,पढ़ो गीता ,सब कुछ पढ़ कर सबसे बड़ा ज्ञानी बन जाओ ,पढ़ो विज्ञान , आइंस्टीन से बड़ा वैज्ञानिक बन गए ,लेकिन सब व्यर्थ अगर अपने को नहीं जाने ।तुम कौन हो , जन्म से पहले अनंत समय में तुम कहां थे ,मरने के बाद फिर अनंत समय में क्या करोगे। उपनिषद बोल रहा है की तुम आत्मा हो या ब्रह्म हो ,जो भी हो ,कभी अपनी आत्मा या ब्रह्म को देखा । तुम अपनी बारे में बेखबर हो ,लेकिन पूरी दुनिया की खबर तुम्हारे मस्तिष्क में है। कितना भी तुम उपनिषद पढ़ लो ,गीता पढ़ लो ,ब्रह्म सूत्र पढ़ लो ,कितना भी सभी धर्म ग्रंथ पढ़ लो ,लेकिन तुम अपने आपको नहीं जान पाओगे। क्या बुद्ध ने किताब पढ़ कर स्वयं को जाना ,क्या महावीर ने जंगल में किताब पढ़ कर स्वयं को जाना , क्या कृष्ण किताब पढ़ कर गीता अर्जुन से कहा था , क्या राम ने या रावण ने हजारों किताब पढ़ कर शक्ति प्राप्त किए थे ।क्या हनुमान ने लाइब्रेरी भर भर किताब जंगल में पढ़ ते थे । क्या तरीका है अपने आप को जान ने के लिए । क्या तरीका है शक्ति या सिद्धि प्राप्त करने के लिए । कितना किताब पढ़ोगे ,दुनिया की पूरे किताब पढ़ लो ,दुनिया के सभी गुरु के किताब पढ़ लो ,सब व्यर्थ हे।जरा इस दुनिया को टेलीस्कोप में देखो ,दुनिया कभी अंत नहीं हुई ।सोचो दुनिया की कोई सीमा हे जैसे किस देश की ,लेकिन सीमा के उस पार क्या है,कुछ तो होगा ,एह दुनिया या स्पेस कभी अंत नहीं हुई । वैसे समय का अगर आरंभ हे ,तब आरंभ से पहले क्या था ,समय था , यह समय भी अनंत हे। तुम सोच रहे हो ,किताब पढ़ कर दुनिया जानोगे ,अपने आप को जानोगे ,असंभव । कितना शब्द की बाते बोलो ,लगेगा की सत्य बोल रहा है , लेकिन ओह असत्य है, तुम आज जन्म हो ,कल मर जाओगे ,कुछ किताब ,गुरु से पढ़ लिए ,तुम्हारा बात सत्य हो जायेगा ।कितना दिन खा , पी कर , किताब और गुरु की बाते से मन भरोगे । होश में तो आ जाओ । केसे लग रहा है,पृथ्वी एक बंदीशाला या जेल हे ,तुम्हारा शरीर में 60परसेंट से ज्यादा जल है,कुछ हड्डी की ढांचा,और ऊपर चर्म है,एक सुई तुम्हारा शरीर में डालेंगे ,कहीं एक्सीडेंट हो गया, विमार हो गए ,तब मर जा रहे हो । तब भी अकड़ हे,अहंकार हे ,चर्म की रोज सुंदर रख रहे हो ,कितना मोह अपने चर्म पर ।इस चर्म के साथ संभोग से तुम्हे आनंद मिल रहा है , होस में हो । जिस दिन तुम मरोगे ,10 या 15 घंटे बाद जब तुम्हारा शरीर नष्ट होना सुरु होगा ,दुर्गंध होगा ,कितना तुम्हारा सुंदर चर्म हो ,कोई पास नहीं आयेगा चूमने के लिए या छूने के लिए । शरीर की तो देखो ,कितने मल,मूत्र भरा हे, उस शरीर से इतनी आसक्ति। कार में या प्लेन में जा रहे हो ,गीत गा रहे हो ,नाच रहे हो ,घूम रहे हो , होगया जिंदगी ,कितना खुश हो , देखो तो अपने आप को देखो इस रक्त से भरी हुई चर्म को ,फिर देखो महाकाश को । में क्या कर सकता हूं ,में भी अपने आप को नहीं जानता हूं ,आत्मा ,ब्रह्म को नहीं देखा ,जन्म या मरण का रहस्य नहीं जानता हूं , जितने भी गुरु हे,सबको सुना ,बेकार हे,मन को थोड़े देर बहलाते हे , बहत किताब पढ़ लिया ,बहत सोच लिया ,बहत देख लिया ,बहत अनुभव हे ,लेकिन सब कुछ बेकार हे ।किस बात की खुशी ,किस बात की आनंद ,यहां मृत्यू की तांडव चल रहा हे ,जन्म मृत्यु की चक्र चल रहा हे , तुम खुश हो ,तुम सच में आनंदित हो ।

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