आहत भाग 193

The condition of a mental patient is very delicate, people still help them. Deependra was also a mental patient. He had a seizure again today and when he has this seizure, he does not recognize anyone. His strength is different from that of common people. increases several times

दीपेन्द्र सबको मारना चाहता था दो तो मर गए थे और तीन जान बचाकर इधर उधर भाग रहे थे और उस लड़की का कहीं भी पता नहीं था वो भी दीपेन्द्र की हालत देखकर डर गई थी वो जान चुकी थी कि दीपेन्द्र अपने होश खो चुका है दीपेन्द्र कभी-कभी हंसता था और कभी-कभी रोने लगता था

वो लड़की एक पत्थर के पीछे छिपी हुई सब कुछ देख रही थी कि किस तरह दीपेन्द्र बड़े बड़े पत्थर उठा कर फेंक रहा था अब रात के साढ़े तीन बजे थे दो आदमी वहां पर मरे पड़े थे और तीन आदमी बहुत दूर भाग गए थे और वहां पर बेहोश पड़े हुए थे

दीपेन्द्र उनके पास धीरे धीरे जा रहा था एक बहुत बड़ा सा पत्थर लेकर, और वो उनके पास पहुंच गया था

वहां जाकर उसने वो बड़ा सा पत्थर उनके सिर पर मार दिया और वे सब बेहोश थे या मर गए कुछ पता भी नहीं चल रहा था अंधेरी रात अब कटने लगी थी दीपेन्द्र भी कुछ दूर जाकर जमीन मे गिर गया था। क्रमशः

“आहत भाग 193” को एक उत्तर

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