दीपेन्द्र सबको मारना चाहता था दो तो मर गए थे और तीन जान बचाकर इधर उधर भाग रहे थे और उस लड़की का कहीं भी पता नहीं था वो भी दीपेन्द्र की हालत देखकर डर गई थी वो जान चुकी थी कि दीपेन्द्र अपने होश खो चुका है दीपेन्द्र कभी-कभी हंसता था और कभी-कभी रोने लगता था
वो लड़की एक पत्थर के पीछे छिपी हुई सब कुछ देख रही थी कि किस तरह दीपेन्द्र बड़े बड़े पत्थर उठा कर फेंक रहा था अब रात के साढ़े तीन बजे थे दो आदमी वहां पर मरे पड़े थे और तीन आदमी बहुत दूर भाग गए थे और वहां पर बेहोश पड़े हुए थे
दीपेन्द्र उनके पास धीरे धीरे जा रहा था एक बहुत बड़ा सा पत्थर लेकर, और वो उनके पास पहुंच गया था
वहां जाकर उसने वो बड़ा सा पत्थर उनके सिर पर मार दिया और वे सब बेहोश थे या मर गए कुछ पता भी नहीं चल रहा था अंधेरी रात अब कटने लगी थी दीपेन्द्र भी कुछ दूर जाकर जमीन मे गिर गया था। क्रमशः

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