जो इंसान सोंचे वो नहीं होता और जो ना सोंचे कभी-कभी वह हो जाता है

कितनी कामनाएँ कितनी इच्छायें इंसान पाल लेता है और उन्हें सत्य करने की भरपूर कोशिश करता है

उसे लगता है कि शायद उसकी ये इच्छा पूरी हो चुकी है आउट दूसरी इच्छा भी पूरी हो चुकी

लेकिन अक्सर ऐसा भी हो जाता है कि सबकुछ ठीक ठाक रहता है परंतु उसके जीवन मे कुछ ऐसा हो जाता है कि उसकी पूर्ण इच्छायें भी उसे रास नहीं आती

क्योंकि इच्छायें तो पूर्ण हो जाती है परंतु इच्छायें उसकी बहुत कीमती चीज या किसी प्यारे और विशेष इंसान को जुदा कर देती है

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