देव दासी भाग 552

कामिनी समझती हैं कि वीर सिंह उसे बहुत प्यार करते हैं और वे उसे कभी भी दुख नहीं देंग उसे बिना देखे वीर सिंह पर शक नहीं करना चाहिए

वीर सिंह कामिनी से कह्ते है कि कल तुम चली जाओगी मैं कैसे रहूँगा तुम्हारे बिना तो एक दिन भी ना बीत सकेगा

कामिनी हंसने लगती है कहती हैं कि अगर मैं ना गई तो सब क्या कहेंगे ये एक रस्म है

जाने दो मुझे

क्रमश

One response to “देव दासी भाग 552”

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