कुछ बीती हुई यादें कभी कभी

मन को झकझोर कर रख देती है जब घेर लेती है

समेट लेती हैं मुझे

कुछ पल के लिए अपना ये वर्तमान भुला देती है लगता है कि उन यादों के सिवा अब कोई है ही नहीं

रुला देती है उस दिन को याद करके जब अपनी छोटी छोटी ख्वाहिश भी पूरी करने के लिए कितनी आंसू आँखों मे ही दब जाते थे

विचलित कर देती है मन को जब वो यादें हमे ये भी बता देती है कि कुछ तो कसूर था मेरा जो कुछ में चाह्ते दबी हुई ही रह गईं

“कुछ बीती हुई यादें कभी कभी” को एक उत्तर

Leave a reply to yagneshthakore जवाब रद्द करें

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें