
रूपा पढ़ाई में लगी हुई है तभी दरवाजे पर दस्तक होती है रूपा दरवाजा खोलती है वहां पापा जी खड़े होते हैं उन्हें हाथ मे गिलास था उसमे गर्म दुध था प्रमोद रूपा से कह्ते है कि लो मैं तुम्हारे लिए दुध लाया हू पी लो तुम्हें तो कुछ होश रहता नहीं है
मैं जाता हू ठीक से पढ़ना कुछ दिन बाद तुम्हारा इंटरव्यू है
तुम्हारी नौकरी लग जाए मुझे चैन की साँस मिले
वो जाने लगते हैं तभी रूपा कहती हैं कि एक सवाल समझ मे नहीं आ रहा है आप मुझे बता दो और प्रमोद रूपा को सवाल समझाने लगते हैं तभी सुनीता बरामदे मे खड़ी होती है वो प्रमोद को रूपा के कमरे मे जाते हुए देख लेती है और तभी प्रीति भी उधर से आती है वो अपनी गाड़ी अंदर कर रहीं होती है सुनीता का नौकर गेट खोलता है तभी सुनीता प्रीति से कहती है कि मैंने अभी उन्हें रूपा के कमरे में जाते देखा है आज तो रघु के सामने रंगे हाथों पकड़ेंगे क्रमशः
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