कितना अजीब लगता है जब खुद को हम शीशे मे देखते हैं
कितना अजीब लगता है कि जब हमे महसूस होता है कि अब हम ढल रहे हैं
लेकिन खुद को ज्ञान देना पड़ता है कि हम तो ढल ही जाएंगे क्योंकि अब शरीर दिन पर दिन पुराना हो रहा
अखिरकार हमारा भी तो एक इतिहास बनना है जब हम अपनी यात्रा पूरी करेंगे
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