मेरा पहला प्यार

मेरा पहला प्यार

मैं जब  बड़ी हुई स्कूल जाती थी तब वो मुझे मिलता

मुझे देखता और देखता ही रहता

मै उसे देखकर हंस देती

वो पास आने मे डरता था

और मैं उसके पास जाना चाहती थी

वो मुझपर विश्वाश ना करता

क्योंकि उसने बहुत पत्थर खाए थे

लेकिन उसने एक दिन मुझपर विश्वाश किया

और मैं उसके पास गई

मैंने उसके सिर पर हाथ फेरा उसे प्यार किया

अब वो मेरे पास आकर बैठ गया

मैं उसकी भूरी आँखों को देखकर हंसती

और उसके पास बैठ गई

उसने मेरी गोद मे अपना सिर रखा

मैंने उसे अपनी गोद मे बैठा लिए

वो मुझे पहचानने लगा

धीरे धीरे वो मेरे पीछे पीछे आने लगा

मैं अपने टिफिन से थोड़ा सा खाना उसे भी दे देती थी

अब हम रोज खेलने लगे

रोज देर हो जाती थी

एक दिन मेरी मम्मी को शक हुआ और वो जानना चाहती थी

वो भी मेरे पीछे पीछे आने लगी वो भी पीछे पीछे आया

जानते हो वो कौन था

वो एक प्यारा सा पिल्ला था जो किसी के घर मे पाला गया था

मम्मी मुझे देखकर हंसने लगी मैंने कहा कि मुझे इसके साथ खेलने मे देर हो जाती है

🤣🤣🤣🤣

“मेरा पहला प्यार” के लिए प्रतिक्रिया 3

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