पहले नमस्ते करना एक संस्कृति होती थी सब अपने बड़ों से नमस्कार करते थे और आजकल तो अगर कोई व्यक्ति मिला तो पहचान ही नहीं पाता है दूर से देखकर चुपके से चला जाता है
अगर कोई अचानक आकर नमस्ते करता है तो बाद मे पता चलता है कि इसका कोई मुझसे काम था
पहले नमस्ते करना एक संस्कृति होती थी सब अपने बड़ों से नमस्कार करते थे और आजकल तो अगर कोई व्यक्ति मिला तो पहचान ही नहीं पाता है दूर से देखकर चुपके से चला जाता है
अगर कोई अचानक आकर नमस्ते करता है तो बाद मे पता चलता है कि इसका कोई मुझसे काम था
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