कभी कभी ना चाहकर भी अपना कुछ किसी से छीनना पड़ता है

कभी कभी ये होता है कि हम सीधे साधे होते हैं तो लोग हमसे बहुत कुछ छीन लेते हैं और हमे शांति से रहने नहीं देते

लेकिन हमे भी अपना जीवन जीना होता है हम भी कितना सहे

हम जब लगता है कि अभी भी हम सीधे और भले बने रहेंगे तो हमारा जीवन तो आगे चलकर दूभर ही हो जाएगा

और हम समझ लेते हैं कि देर आए दुरस्त आए

हम भी अपना सामान बचाना शुरू कर देते हैं और सबके बुरे भी बन जाते हैं लेकिन हम बुरे बन भी जाए तो क्या

लोगों से ज्यादा अपना जीवन प्यारा है बाद में कोई हमे कुछ नहीं देगा और हम गर्त मे चले जाएंगे और भूले बिसरे हो जाएंगे इसीलिए हमे समय रहते सावधान हो जाना चाहिए

❤️❤️

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“कभी कभी ना चाहकर भी अपना कुछ किसी से छीनना पड़ता है” को एक उत्तर

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