जब दो अनजान मिलते हैं

पहले तो एक दूसरे मे आकर्षण होता है एक दूसरे से खिंचते है

एक दूसरे के करीब आने मे कुछ डरते हैं

कुछ अपनी बात कहने से कतराने लगते हैं

पर परिस्थितियों के आगे झुकते हैं और बिल्कुल करीब आ जाते हैं

अपनी एक दुनिया बसाने की राह खोजते है

अपनी कोई एक निशानी छोड़ना चाहते हैं

कभी लड़ते हैं

कभी प्यार करते हैं

कभी एक दूसरे को दोषी करार देते हैं

कभी एक दूसरे को मनाते है

कभी कभी धमकियां देते हैं

कभी कभी घर से भाग जाते हैं

पर याद आती है तो वापस भी आ जाते हैं

कभी कभी अपने सुख अपने साथी को समर्पित कर देते हैं

अपने दुख बताते हैं

अपने साथी के दुःखों को दूर करते हैं

एक दूसरे के बिना रह नहीं पाते हैं

जी जान अर्पित करते हैं

ये दो अनजाने खुद को भी भूल जाते हैं

अपनी निशानियों मे

उसकी परेशानियों मे

🌹🌹🌹

“जब दो अनजान मिलते हैं” को एक उत्तर

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