
कितना अच्छा लगता है कि पेंड पौधे ठंडी हवा या किसी नदी के किनारे बैठ कर शून्य मे आंख बंद करके ध्यान लगाए
कितना अच्छा लगता है जब चिडियों की अवाज सुन कर उनकी बात समझने की कोशिश करना
कितना अच्छा लगता है जब ओस से भीगी घास पर नंगे पैर टहलना
कितना अच्छा लगता है जब पेड़ों की पत्तियो को छू लेना
छोटे छोटे अंकुरित पौधे को देखकर सोचना कि ये भी इस मिट्टी मे उपजा है इसे भी प्रकृति पालेगी ये भी बड़ा होगा और इसी मिट्टी मे फिर से मिल जाएगा
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