प्रकृति के बीच समय का गुजरना

कितना अच्छा लगता है कि पेंड पौधे ठंडी हवा या किसी नदी के किनारे बैठ कर शून्य मे आंख बंद करके ध्यान लगाए

कितना अच्छा लगता है जब चिडियों की अवाज सुन कर उनकी बात समझने की कोशिश करना

कितना अच्छा लगता है जब ओस से भीगी घास पर नंगे पैर टहलना

कितना अच्छा लगता है जब पेड़ों की पत्तियो को छू लेना

छोटे छोटे अंकुरित पौधे को देखकर सोचना कि ये भी इस मिट्टी मे उपजा है इसे भी प्रकृति पालेगी ये भी बड़ा होगा और इसी मिट्टी मे फिर से मिल जाएगा

“प्रकृति के बीच समय का गुजरना” के लिए प्रतिक्रिया 2

Leave a reply to anupama shukla जवाब रद्द करें

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें